उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार कलश यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों में पुत्रवधू की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वह परिवार के मान-सम्मान और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। ऐसी धार्मिक परंपराओं को श्रद्धा और मर्यादा के साथ निभाना हमारी जिम्मेदारी है।
हरि भाटी ने कहा कि जो व्यक्ति सनातन धर्म की परंपराओं, संस्कारों और मर्यादाओं को आगे बढ़ाता है, वह समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है। हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए आने वाली पीढ़ी को भी इनके महत्व से परिचित कराना चाहिए।